दफ्तर की वो सुहानी रात और अंजलि का साथ
दफ्तर की घड़ी में रात के ग्यारह बज चुके थे और पूरे फ्लोर पर सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ मेरी डेस्क की लाइट जल रही थी और बगल के केबिन में अंजलि अभी भी अपनी फाइलों में डूबी हुई थी। प्रोजेक्ट की डेडलाइन सिर पर थी और हम दोनों ही इस काम को खत्म करने … Read more