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रेल की रात और अनजानी चाहत

रात के गहराते सन्नाटे में राजधानी एक्सप्रेस अपनी पूरी रफ़्तार से पटरियों पर दौड़ रही थी और ट्रेन की गड़गड़ाहट के बीच केबिन में एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी। अर्जुन अपने सामने वाली बर्थ पर बैठी उस सुंदर महिला को देख रहा था जिसका नाम नैना था और जिससे उसकी बातचीत बस कुछ … Read more

तन्हा दोपहर और सुनिता बुआ की प्यासी खाई

तन्हा दोपहर और सुनिता बुआ की प्यासी खाई—> दोपहर की उस खामोश तन्हाई में सुनिता बुआ सोफे पर लेटी हुई थीं, और घर के बाकी लोग किसी शादी में गए हुए थे। राघव कमरे में दाखिल हुआ तो उसकी नजर सीधे बुआ के जिस्म पर पड़ी, जो पसीने की हल्की बूंदों से चमक रहा था। … Read more

कविता बुआ की रेशमी खाई और गर्म दोपहर का मदहोश खेल

कविता बुआ की रेशमी खाई और गर्म दोपहर का मदहोश खेल—> दोपहर की उस भयंकर तपती गर्मी में घर के सभी सदस्य गहरी नींद की आगोश में थे, लेकिन २२ साल के आर्यन की आँखों से नींद कोसों दूर थी। उसकी ३२ साल की बेहद खूबसूरत और जवान कविता बुआ आज ही शहर से उनके … Read more

रात के सफर की एक मदहोश चु@@ई का एहसास

रात के सफर की एक मदहोश चु@@ई का एहसास —> ट्रेन की उस कूपे में हवा जैसे ठहर गई थी। दिल्ली से मुंबई जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस की गड़गड़ाहट के बीच मेरा दिल अपनी ही रफ्तार से धड़क रहा था। सामने वाली सीट पर बैठी उस अजनबी महिला की रेशमी साड़ी की सरसराहट मुझे बार-बार … Read more

विधवा चाची के साथ रसीली चु@@ई का सुख

विधवा चाची के साथ रसीली चु@@ई का सुख —> आंगन में बैठी सुमित्रा चाची की उदासी उनकी आंखों में साफ दिख रही थी। दोपहर की तपती धूप उनके चेहरे पर खेल रही थी और उनके सादे सफेद लिबास के नीचे से उनके भारी तरबूज उभर कर सामने आ रहे थे। मैंने दूर से ही उन्हें … Read more

पुरानी क्रश के साथ अधूरी हसरतें और पहली चु@@ई का अहसास

पुरानी क्रश के साथ अधूरी हसरतें और पहली चु@@ई का अहसास —> सालों बाद प्रिया से मिलना किसी सुहाने सपने जैसा था। वह आज भी उतनी ही हसीन और दिलकश लग रही थी जितनी स्कूल के दिनों में हुआ करती थी। मेरे दिल की धड़कनें उसे देखते ही तेज हो गई थीं और मेरी आँखों … Read more

कविता की तीखी चु@@ई

कविता की तीखी चु@@ई—>उस दोपहर की खामोशी में एक अजीब सी गर्माहट थी। समीर अपने ससुराल आया हुआ था और घर के बाकी सब लोग किसी पास के रिश्तेदार की शादी में गए हुए थे। समीर की साली कविता, जिसकी उम्र लगभग चौबीस साल थी, घर पर ही रुकी हुई थी क्योंकि उसे कॉलेज का … Read more

अजनबी कविता संग चु@@ई

अजनबी कविता संग चु@@ई—>उस रात की ट्रेन की यात्रा मेरे जीवन की सबसे यादगार रातों में से एक थी। रात के करीब दस बज रहे थे जब मैं अपनी सीट ढूँढता हुआ कोच के अंदर दाखिल हुआ। जैसे ही मैं अपनी बर्थ के पास पहुँचा, मेरी नज़र नीचे वाली बर्थ पर बैठी एक बेहद खूबसूरत … Read more

सोतेली माँ की चु@@ई

समीर के घर में सन्नाटा पसरा हुआ था क्योंकि उसके पिता एक हफ्ते के लिए शहर से बाहर किसी बिजनेस ट्रिप पर गए थे। घर में सिर्फ समीर और उसकी जवान सोतेली माँ कविता ही थे। कविता की उम्र अभी मुश्किल से पैंतीस साल की रही होगी, और उसका शरीर किसी ढलती हुई शाम की … Read more

कविता की ट्रेन वाली चु@@ई

कविता की ट्रेन वाली चु@@ई —> समीर अपनी ऑफिस की थकान मिटाने के लिए मुंबई से दिल्ली की ओर जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस के अपने कोच में दाखिल हुआ था। वह खिड़की वाली सीट पर बैठा बाहर के अंधेरे को देख रहा था कि तभी एक बेहद खूबसूरत महिला उसके सामने वाली सीट पर आकर … Read more

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