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पड़ोसी रीमा भाभी की गहरी खुदाई

शहर की उस शांत और तंग गली में रीमा भाभी का घर मेरे किराए के कमरे के ठीक सामने वाली मंजिल पर था। रीमा भाभी की उम्र करीब पैंतीस साल रही होगी, लेकिन उनके शरीर की बनावट और उनके यौवन का उभार किसी कयामत से कम नहीं था। जब भी वह शाम को अपनी बालकनी … Read more

बर्फीली वादियों की गर्माहट

पहाड़ों की उस ऊँची चोटी पर स्थित लकड़ी के छोटे से केबिन में बाहर बर्फ की चादर बिछी हुई थी और ठंडी हवाएं खिड़कियों से टकराकर अजीब सी सुरीली आवाज़ें निकाल रही थीं। समीर और राधिका एक दूसरे के बेहद करीब बैठे थे, उनके बीच जल रही आग की लपटें उनके चेहरों पर एक सुनहरी … Read more

पड़ोसी सुनीता भाभी की खुदाई

तपती दोपहर में जब पूरा मोहल्ला गहरी नींद में सोया होता था, तब कॉलेज जाने वाला रोहित अपने कमरे की खिड़की से बगल वाले घर की बालकनी की ओर टकटकी लगाए रहता था। वहाँ सुनीता भाभी, जो उम्र में उससे करीब सात-आठ साल बड़ी थीं, अक्सर अपने गीले कपड़े सुखाने के लिए आती थीं। उनके … Read more

खेते में मां को चो@@

 शाम ढल रही थी, गाँव के बाहर फैले हरे-भरे खेतों में धान की रोपाई का काम लगभग खत्म हो चुका था। शकुंतला, जो अब ३६ साल की हो चुकी थी, अपनी गोरी चमकती त्वचा, पतली कमर और भरे-पूरे शरीर के साथ खेत में काम कर रही थी। उसके बड़े-बड़े तरबूज जैसे स्तन ब्लाउज में कसकर … Read more

अजनबी संग चु@@ई

अजनबी संग चु@@ई—>रात के करीब ग्यारह बज रहे थे और राजधानी एक्सप्रेस अपनी पूरी रफ़्तार से पटरियों पर दौड़ रही थी। माया अपनी खिड़की वाली सीट पर बैठी बाहर के घुप अंधेरे को निहार रही थी, जहाँ कभी-कभी दूर जलती कोई रोशनी उसकी आँखों में चमक पैदा कर देती थी। माया के बदन पर एक … Read more

ट्यूशन वाली अनीता मैम की खुदाई

ट्यूशन वाली अनीता मैम की खुदाईआयुष अपनी ट्यूशन टीचर अनीता मैम के घर के ड्राइंग रूम में बैठा था, जहाँ बाहर की चिलचिलाती धूप और कमरे के भीतर के ठंडे सन्नाटे के बीच एक अजीब सी बेचैनी तैर रही थी। अनीता मैम आज गहरे बैंगनी रंग की रेशमी साड़ी में किसी अप्सरा से कम नहीं … Read more

पड़ोसी सिमरन की कामुक चु@@ई

पड़ोसी सिमरन की कामुक चु@@ई—> दोपहर का सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेर रहा था और इस गर्मी में सिमरन का मन भी अजीब सी बेचैनी से भरा हुआ था। उसका पति बिजनेस के सिलसिले में अक्सर शहर से बाहर रहता था और वह इस आलीशान फ्लैट में खुद को एकदम तन्हा महसूस करती थी। सिमरन … Read more

कलात्मकता की परछाईं

पहाड़ों की उस ठंडी और धुंधली दोपहर में सन्नाटा पसरा हुआ था, जहाँ विक्रम अपने विशाल कैनवास पर नैना की जीवंत छवि उतारने की कोशिश कर रहा था। खिड़की से आती सुनहरी धूप नैना के अर्धनग्न बदन पर गिरकर उसे किसी कीमती प्रतिमा की तरह चमका रही थी, और विक्रम की पैनी आँखें उसकी हर … Read more

रेखा माँ की चु@@ई

रेखा माँ की चु@@ई—> दोपहर की वह तपती हुई खामोशी पूरे बंगले में पसरी हुई थी, जहाँ सूरज की तीखी किरणें खिड़कियों के पर्दों को भेदकर फर्श पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही थीं। अमित अपने कमरे में लेटा हुआ था, लेकिन उसकी आँखों में नींद का नामो-निशान नहीं था, क्योंकि उसके जहन में सिर्फ … Read more

पुरानी हवेली की जादूगरनी से प्यार

 आरव पच्चीस साल का था। दिल्ली में आईटी इंजीनियर की नौकरी करता था, लेकिन दादी की मौत के बाद वसीयत में हवेली मिली तो वो राजस्थान के छोटे से गांव कालापुर लौट आया। गांव के चारों तरफ पहाड़ियां थीं, घने जंगल, पुराने कुएं और वो भारी-भरकम हवेली जो गांव के सबसे कोने में खड़ी थी। … Read more

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