रेखा माँ की चु@@ई
रेखा माँ की चु@@ई—> दोपहर की वह तपती हुई खामोशी पूरे बंगले में पसरी हुई थी, जहाँ सूरज की तीखी किरणें खिड़कियों के पर्दों को भेदकर फर्श पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही थीं। अमित अपने कमरे में लेटा हुआ था, लेकिन उसकी आँखों में नींद का नामो-निशान नहीं था, क्योंकि उसके जहन में सिर्फ … Read more