जवान दर्जी और नैना की चु@@ई
शहर की उस शांत गली में समीर की छोटी सी बुटीक अपनी कलाकारी के लिए जानी जाती थी। दोपहर का वक्त था और सूरज की तपिश सड़कों पर सन्नाटा फैला चुकी थी, तभी नैना ने दुकान के अंदर कदम रखा। नैना, जिसकी उम्र लगभग बत्तीस साल थी, अपनी रेशमी साड़ी में किसी अप्सरा से कम … Read more