रेखा मौसी की अधूरी प्यास और हमारी यादगार खुदाई
गर्मियों की उन लंबी और सुनसान दोपहरों में जब पूरा मोहल्ला गहरी नींद में सोया रहता था, मेरे घर की आबोहवा कुछ अलग ही करवटें ले रही थी। मेरी विधवा मौसी, रेखा, जो पिछले कुछ दिनों से हमारे साथ रहने आई थीं, उनकी उपस्थिति ने मेरे मन में एक अजीब सी हलचल पैदा कर … Read more