अजनबी संग चु@@ई
अजनबी संग चु@@ई—>रात के करीब ग्यारह बज रहे थे और राजधानी एक्सप्रेस अपनी पूरी रफ़्तार से पटरियों पर दौड़ रही थी। माया अपनी खिड़की वाली सीट पर बैठी बाहर के घुप अंधेरे को निहार रही थी, जहाँ कभी-कभी दूर जलती कोई रोशनी उसकी आँखों में चमक पैदा कर देती थी। माया के बदन पर एक … Read more