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ट्रेनर संग दमदार चु@@ई

रिया ने जैसे ही जिम के भारी कांच वाले दरवाजे को धकेला, उसके कानों में भारी लोहे के टकराने की आवाज और बेस वाली म्यूजिक की धमक सुनाई दी। वह पिछले कई सालों से खुद को फिट रखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन आज उसका मन कुछ अलग ही बेचैनी महसूस कर रहा था। जिम के एक कोने में सुनील खड़ा था, जो कभी कॉलेज के दिनों में रिया का सबसे बड़ा क्रश हुआ करता था। आज सुनील एक प्रोफेशनल जिम ट्रेनर बन चुका था और उसकी कद-काठी किसी यूनानी देवता जैसी लग रही थी। रिया की नजरें जैसे ही सुनील की चौड़ी छाती और उसकी बाजुओं पर उभरी हुई नसों पर पड़ीं, उसके शरीर के भीतर एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। सुनील ने भी उसे देख लिया था और उसकी आंखों में वही पुरानी चमक थी, जो शायद वक्त के साथ और भी गहरी हो गई थी।

रिया के शरीर की बनावट आज बहुत ही आकर्षक लग रही थी, उसने टाइट काले रंग की लेगिंग और एक गुलाबी रंग का छोटा सा जिम टॉप पहना हुआ था। उसके शरीर के ऊपरी हिस्से पर मौजूद दोनों तरबूज उस तंग कपड़े के भीतर से बाहर निकलने को बेताब दिख रहे थे, और जब वह चलती थी, तो उनका उभार सुनील की धड़कनें बढ़ा देता था। लेगिंग इतनी चुस्त थी कि रिया का भरा हुआ पिछवाड़ा हर कदम के साथ थिरकता हुआ साफ नजर आता था, जिससे उसकी कामुकता और भी निखर कर आ रही थी। सुनील की नजरें बार-बार रिया की कमर के उस घुमाव पर टिक जाती थीं, जहां से उसके शरीर की ढलान शुरू होती थी। वह जानता था कि आज की वर्कआउट सेशन बहुत ही खास और लंबी होने वाली है, क्योंकि रिया के बदन की महक पूरे वातावरण में घुलने लगी थी।

सुनील ने पास आकर रिया का स्वागत किया और उसकी आवाज की गहराई ने रिया के दिल को छू लिया। उन दोनों के बीच कॉलेज की बातें होने लगीं, जिससे एक पुराना भावनात्मक जुड़ाव फिर से जिंदा हो गया। रिया ने बताया कि वह अपनी लाइफ में कितनी अकेली महसूस करती है, और सुनील ने उसकी आंखों में झांकते हुए कहा कि अब उसे अकेले रहने की जरूरत नहीं है। बातों ही बातों में उनके बीच की दूरी कम होने लगी और एक-दूसरे के प्रति आकर्षण और भी गहरा होता गया। रिया को महसूस हो रहा था कि सुनील की मौजूदगी ही उसके शरीर में गर्मी पैदा कर रही है। उनके बीच एक ऐसा खिंचाव था जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल था, बस एक अनकही प्यास थी जो दोनों की आंखों में साफ झलक रही थी और जिसे बुझाने का वक्त करीब आ रहा था।

वर्कआउट शुरू हुआ और सुनील ने रिया को स्ट्रेचिंग करने के लिए कहा। जब सुनील ने रिया के पैरों को फैलाकर स्ट्रेच करना शुरू किया, तो उसका हाथ अनजाने में रिया की जांघों के ऊपरी हिस्से को छू गया। उस स्पर्श से रिया के मुंह से एक धीमी सी आह निकल गई और उसकी सांसें तेज चलने लगीं। सुनील ने धीरे से रिया की कमर को पकड़ा और उसे झुकने को कहा, जिससे उसके दोनों तरबूज नीचे की ओर लटक गए और उनके बीच की गहरी खाई साफ नजर आने लगी। रिया को महसूस हो रहा था कि सुनील का शरीर उसके बहुत करीब है, और उसकी सांसों की गर्माहट रिया की गर्दन पर महसूस हो रही थी। झिझक अब धीरे-धीरे मिट रही थी और उसकी जगह एक तीव्र इच्छा ले रही थी, जो दोनों के मन में तूफान खड़ा कर रही थी।

सुनील ने धीरे से अपना हाथ रिया के पेट से ऊपर ले जाते हुए उसके तरबूजों को सहलाना शुरू किया। रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं और सुनील के स्पर्श का आनंद लेने लगी। कपड़े के ऊपर से ही सुनील ने उन दोनों गोलों को अपनी हथेलियों में भरा और धीरे-धीरे उन्हें भींचने लगा। रिया के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं और उसके तरबूजों के ऊपर मौजूद मटर अब सख्त होकर टॉप को फाड़कर बाहर आने की कोशिश कर रहे थे। सुनील ने झुककर रिया के कान के पास फुसफुसाते हुए कहा कि वह कब से इस पल का इंतजार कर रहा था। उसने रिया को अपनी ओर घुमाया और उसके होंठों का रस पीना शुरू कर दिया, उनके होंठ आपस में ऐसे उलझ गए जैसे दो प्यासी आत्माएं एक-दूसरे को सोख लेना चाहती हों।

अब नियंत्रण पूरी तरह से खो चुका था, सुनील ने रिया को जिम के एक बेंच पर लिटा दिया। उसने रिया का टॉप ऊपर उठाया और उसके गोरे तरबूजों को अपनी आंखों के सामने आजाद पाया। उसने अपनी जीभ से रिया के मटरों को सहलाया, जिससे रिया का पूरा शरीर थरथराने लगा। रिया ने सुनील के बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और उसे अपनी ओर और भी जोर से खींच लिया। सुनील नीचे की ओर बढ़ा और उसने रिया की लेगिंग को धीरे-धीरे उतारना शुरू किया। जैसे ही रिया की खाई सुनील की नजरों के सामने आई, वह उसकी खूबसूरती देख दंग रह गया। वहां मौजूद छोटे-छोटे बाल पसीने से भीगे हुए थे, जो उसकी कामुकता को और बढ़ा रहे थे। सुनील ने अपना चेहरा वहां ले जाकर रिया की खाई का रस चखना शुरू किया, जिससे रिया बिस्तर पर छटपटाने लगी।

रिया की उत्तेजना अब चरम पर थी, उसने सुनील के पैंट के भीतर हाथ डाला और उसके विशाल खीरे को बाहर निकाला। वह खीरा इतना सख्त और बड़ा था कि उसे देखकर रिया की आंखें फटी रह गईं। उसने उसे अपने दोनों हाथों में पकड़ा और उसे सहलाने लगी। सुनील ने गहरी सांस ली जब रिया ने उस खीरे को अपने मुंह में लिया और उसे चूसना शुरू किया। रिया की जीभ का जादू सुनील को पागल कर रहा था, वह उसके सिर को सहलाते हुए उसे गहराई तक लेने का इशारा कर रहा था। पूरे जिम में सिर्फ उनके भारी सांसों की आवाज और रस निकलने की तैयारी की आहट थी। सुनील ने महसूस किया कि अब वक्त आ गया है कि वह रिया की प्यास को पूरी तरह से बुझा दे और इस मिलन को मुकम्मल करे।

सुनील ने रिया को अपनी बाहों में उठाया और उसे जिम की बड़ी मशीन के सहारे खड़ा कर दिया। उसने रिया की एक टांग को ऊपर उठाया और अपने विशाल खीरे को उसकी खाई के मुहाने पर रखा। जैसे ही उसने पहला धक्का लगाया, रिया की एक तेज चीख निकल गई लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि बेइंतहा आनंद की थी। सुनील ने धीरे-धीरे गहराई तक खोदना शुरू किया, और हर धक्के के साथ रिया के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे। सुनील ने उसे सामने से खोदना जारी रखा और उसके होंठों को चूमता रहा। रिया के भीतर से रस निकलने लगा था जिससे खुदाई और भी आसान और आनंददायक हो गई थी। दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे और उनके अंगों के टकराने की आवाज ‘चप-चप’ करके गूंज रही थी, जो इस माहौल को और भी कामुक बना रही थी।

कुछ देर सामने से खोदने के बाद, सुनील ने रिया को पलट दिया और उसे पिछवाड़े से खोदने वाली पोजीशन में आने को कहा। रिया ने अपने दोनों हाथ जमीन पर टिका दिए और अपना पिछवाड़ा ऊपर की ओर उठा लिया। सुनील ने पीछे से आकर अपने खीरे को फिर से उसकी खाई में उतारा और तेज रफ्तार से खुदाई शुरू की। रिया के मुंह से लगातार आहें और सिसकारियां निकल रही थीं, वह सुनील से और भी जोर से खोदने की मिन्नतें कर रही थी। सुनील के धक्के इतने दमदार थे कि रिया का पूरा बदन हिल रहा था। वह उसके तरबूजों को पीछे से पकड़कर जोर-जोर से मसल रहा था और उसके मटरों को अपनी उंगलियों से दबा रहा था। यह अहसास इतना गहरा था कि रिया को लगा जैसे वह स्वर्ग के द्वार पर खड़ी है।

अंत में, दोनों की उत्तेजना अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। सुनील ने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी और रिया की खाई के भीतर गहराई तक गोते लगाने लगा। रिया ने महसूस किया कि उसके भीतर से रस की एक धारा छूटने वाली है, उसने सुनील को जोर से जकड़ लिया। सुनील ने भी एक आखिरी जोरदार धक्का लगाया और अपने खीरे का सारा गरम रस रिया की खाई की गहराइयों में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए वहीं गिर पड़े, उनकी सांसें इतनी तेज थीं जैसे अभी-अभी कोई मैराथन दौड़कर आए हों। शरीर ढीला पड़ चुका था लेकिन मन में एक असीम शांति और संतुष्टि थी। रिया की हालत पसीने से तर-बतर थी और उसके चेहरे पर एक अलग ही नूर था, जो उस खुदाई की गवाही दे रहा था।

शावर के नीचे जब वे दोनों एक-दूसरे को साफ कर रहे थे, तो उनके बीच की वो झिझक पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। रिया ने सुनील की छाती पर अपना सिर रखा और महसूस किया कि यह सिर्फ शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि बरसों की अधूरी चाहत का पूरा होना था। सुनील ने उसे कसकर गले लगाया और उसके माथे को चूमा। अब जिम की वो खामोशी उन्हें डरा नहीं रही थी, बल्कि उनकी नई शुरुआत की गवाह बन रही थी। उन्होंने तय किया कि यह सिलसिला अब रुकने वाला नहीं है, क्योंकि जो मजा उन्हें एक-दूसरे के शरीर की खुदाई में मिला था, वह दुनिया की किसी और चीज में नहीं था। रिया अब उस जिम की न सिर्फ एक मेंबर थी, बल्कि उस ट्रेनर के दिल और शरीर की मालकिन भी बन चुकी थी।

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