नीरज करीब पांच साल बाद अपनी कॉलेज की सबसे अच्छी दोस्त रिया से मिलने उसके नए फ्लैट पर पहुँचा था। रिया अब पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत और निखरी हुई लग रही थी, उसकी देह की बनावट अब एक परिपक्व महिला की तरह हो गई थी। उसने नीले रंग की एक बहुत ही पतली और रेशमी मैक्सी पहन रखी थी, जिसके अंदर से उसके शरीर के उभार साफ झलक रहे थे। उसकी छाती पर उभरे हुए दो बड़े और रसीले तरबूज उस पतली मैक्सी को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे, और उन तरबूजों के ऊपर साफ तौर पर दो नन्हे मटर के दानों जैसी सख्त गुठलियाँ दिखाई दे रही थीं। जैसे ही नीरज अंदर आया, रिया ने उसे गले लगा लिया और उस आलिंगन में नीरज को रिया के उन भारी तरबूजों का नरम अहसास अपनी चौड़ी छाती पर महसूस हुआ, जिससे उसके शरीर में एक अजीब सी बिजली दौड़ गई।
रिया का शरीर किसी तराशी हुई मूरत की तरह था, उसकी कमर इतनी पतली थी कि नीरज उसे अपनी एक हथेली में भर सकता था, लेकिन उसके नीचे का पिछवाड़ा काफी भारी और गोल था जो चलने पर बड़ी खूबसूरती से हिलता था। रिया ने उसे सोफे पर बिठाया और खुद उसके करीब आकर बैठ गई, जिससे नीरज को उसके बदन की भीनी-भीनी खुशबू आने लगी। रिया की आंखों में एक पुरानी प्यास और शरारत साफ देखी जा सकती थी, वह बार-बार अपनी लंबी उंगलियों से अपने बालों को पीछे करती और झुककर नीरज को पानी पिलाती, जिससे उसके भारी तरबूजों की गहरी घाटी नीरज की आंखों के सामने पूरी तरह खुल जाती थी। नीरज की नजरें रिया के उस रेशमी लिबास के आर-पार जाने की कोशिश कर रही थीं, जहाँ से उसके अंगों की कोमलता उसे पागल कर रही थी।
नीरज और रिया पुरानी यादों में खो गए, लेकिन बातों के बीच जो खामोशी आती थी, वह कामुकता से भरी होती थी। रिया ने धीरे से नीरज का हाथ पकड़ा और कहा कि उसने उसे बहुत याद किया, उसकी आवाज में एक अजीब सी थरथराहट थी जो नीरज के दिल तक पहुँच रही थी। नीरज ने भी अपनी भावनाओं को नहीं रोका और रिया के गालों को सहलाने लगा, उसकी त्वचा मखमल की तरह मुलायम थी। रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और नीरज की हथेली पर अपना चेहरा टिका दिया, उसकी गर्म सांसें नीरज की उंगलियों को सहला रही थीं। दोनों के बीच का मानसिक पर्दा धीरे-धीरे हट रहा था और सालों की दबी हुई इच्छाएं अब बाहर निकलने को छटपटा रही थीं, हवा में एक गहरा तनाव पैदा हो गया था।
नीरज का हाथ धीरे-धीरे रिया के कंधे से फिसलते हुए उसकी कमर की ओर बढ़ा और फिर उसने रिया को अपनी ओर खींच लिया। रिया के होंठ नीरज के होठों के इतने करीब थे कि दोनों एक-दूसरे की सांसें पी रहे थे। नीरज ने बिना देर किए रिया के होठों का रस पीना शुरू कर दिया, वह उसे बड़ी शिद्दत से चूमने लगा। रिया ने भी अपनी बाहें नीरज के गले में डाल दीं और उसके बालों में अपनी उंगलियां फँसा लीं। नीरज का एक हाथ अब रिया के एक भारी तरबूज पर जा पहुँचा था, जिसे उसने अपनी बड़ी हथेली में भरकर धीरे से दबाया। रिया के मुंह से एक दबी हुई कराह निकली और उसने नीरज को और भी जोर से अपनी ओर भींच लिया, मानो वह उसे खुद में समा लेना चाहती हो।
नीरज ने धीरे से रिया की मैक्सी के स्ट्रैप को उसके कंधों से नीचे गिरा दिया, जिससे रिया के दोनों दूधिया तरबूज पूरी तरह आजाद होकर उसके सामने आ गए। नीरज उन तरबूजों की गोलाई और उन पर मौजूद गुलाबी मटर को देखकर सुध-बुध खो बैठा। उसने झुककर एक तरबूज को अपने मुंह में भर लिया और उसे चूसने लगा, जबकि दूसरे मटर को वह अपनी उंगलियों से मसल रहा था। रिया बिस्तर पर पीछे की ओर गिर गई और नीरज उसके ऊपर आ गया। रिया की सासों की गति बढ़ गई थी और उसका पूरा शरीर कांप रहा था। नीरज ने अपने हाथ नीचे बढ़ाए और रिया की जांघों को सहलाते हुए उसकी गहरी खाई के पास पहुँचा, जहाँ घने और मुलायम बाल मौजूद थे जो उस जगह की सुरक्षा कर रहे थे।
रिया की खाई अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी और वहां से प्यार का रस रिस रहा था। नीरज ने अपनी उंगली से उस खाई को खोदना शुरू किया, तो रिया की कमर ऊपर की ओर उचकी और उसने अपने दांतों तले अपना निचला होंठ दबा लिया। नीरज अपनी उंगली को अंदर-बाहर कर रहा था और कभी-कभी वह अपनी जीभ से भी उस खाई का स्वाद ले रहा था। रिया पागलों की तरह अपना सिर हिला रही थी और नीरज का नाम पुकार रही थी। नीरज ने महसूस किया कि अब बर्दाश्त करना मुश्किल है, उसका अपना खीरा भी अब पूरी तरह सख्त और लंबा हो चुका था, जो रिया की खुदाई करने के लिए तड़प रहा था। नीरज ने अपने कपड़े उतारे और रिया के सामने अपने कड़े हुए खीरे के साथ खड़ा हो गया।
रिया ने जब नीरज का वह लंबा और मोटा खीरा देखा, तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और उस खीरे को पकड़कर सहलाने लगी। नीरज को रिया के कोमल हाथों का स्पर्श पाकर जन्नत जैसा अहसास हुआ। फिर रिया ने आगे बढ़कर उस खीरे को अपने मुंह में ले लिया और उसे किसी लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। नीरज की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा और वह आहें भरने लगा। रिया बड़े प्यार से उस खीरे के ऊपरी हिस्से को अपनी जीभ से चाट रही थी और नीरज के अंडों को सहला रही थी। नीरज ने ज्यादा देर तक खुद को नहीं रोका और रिया को सीधा लेटाकर उसके ऊपर आ गया ताकि असली खुदाई शुरू कर सके।
नीरज ने रिया की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने खीरे की नोक को उसकी गीली और तंग खाई के मुहाने पर टिका दिया। रिया ने नीरज की पीठ को अपने नाखूनों से जकड़ लिया और गहरी सांस ली। नीरज ने एक झटके में अपना आधा खीरा उस तंग खाई के अंदर उतार दिया। रिया के मुंह से एक तीखी चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि चरम सुख की शुरुआत थी। उसकी खाई इतनी तंग थी कि नीरज को अपना खीरा अंदर धकेलने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी। नीरज ने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू किया और अपनी रफ्तार बढ़ाई। हर धक्के के साथ नीरज का खीरा रिया की खाई की गहराइयों को नाप रहा था और रिया जोर-जोर से कराह रही थी।
कमरे में सिर्फ शरीर के टकराने की आवाजें और दोनों की भारी सांसें गूँज रही थीं। नीरज अब पूरी ताकत से खुदाई कर रहा था, उसके धक्के इतने जबरदस्त थे कि रिया का पूरा शरीर बिस्तर पर ऊपर-नीचे उछल रहा था। रिया चिल्ला रही थी, “हाँ नीरज, और तेज… मुझे पूरी तरह खोद दो… अपना सारा रस मुझमें भर दो!” नीरज ने रिया को पलटा और उसे पिछवाड़े की तरफ से खोदना शुरू किया। रिया अपने घुटनों और हाथों के बल आ गई, और नीरज उसके पीछे लग गया। इस स्थिति में नीरज को रिया का भारी पिछवाड़ा और उसके हिलते हुए तरबूज साफ दिख रहे थे। उसने रिया की कमर पकड़कर अपने खीरे को पूरी ताकत से उसकी खाई में घुसा दिया, जिससे रिया का शरीर धनुष की तरह मुड़ गया।
खुदाई अब अपने चरम पर थी, नीरज और रिया दोनों का पसीना एक-दूसरे में मिल चुका था। नीरज की रफ्तार अब बेकाबू हो गई थी, वह मशीन की तरह रिया की खाई को खोद रहा था। रिया का शरीर अब चरम आनंद की कगार पर था, उसकी खाई के अंदर की दीवारें नीरज के खीरे को कसकर जकड़ रही थीं। अचानक रिया का पूरा शरीर अकड़ गया और उसकी खाई से भारी मात्रा में रस निकलने लगा, वह झड़ रही थी। ठीक उसी पल नीरज ने भी अपने अंतिम धक्के मारे और अपना सारा गर्म सफेद रस रिया की खाई की गहराइयों में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे पर गिर पड़े, पसीने से लथपथ और पूरी तरह संतुष्ट। रिया ने नीरज को कसकर पकड़ लिया और दोनों काफी देर तक उसी हालत में लेटे रहे, जैसे वक्त थम गया हो।