कविता माँ की चु@@ई—>
शहर की उस शांत दोपहर में जब घर के बाकी लोग काम से बाहर थे, आर्यन अपनी सौतेली माँ कविता के साथ घर में अकेला था। कविता की उम्र छत्तीस साल थी, लेकिन उसका शरीर किसी कच्ची कली की तरह खिला हुआ था। उसकी गेंहुआ रंगत और रेशमी साड़ी के भीतर छिपे उसके उभार किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी थे। आर्यन अपनी किताबों में मन लगाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार रसोई से आ रही कविता की पायल की छन-छन और उसकी धीमी गुनगुनाहट पर जा रहा था। कविता के शरीर का ढांचा बहुत ही आकर्षक था, उसके मध्यम कद और भारी नितंबों ने साड़ी को एक अलग ही गोलाई दे दी थी। वह जब चलती थी, तो उसकी कमर का लचीलापन आर्यन के दिल की धड़कनें बढ़ा देता था।
कविता और आर्यन के बीच एक अजीब सा भावनात्मक खिंचाव था, जो पिछले कुछ महीनों से और भी गहरा होता जा रहा था। कविता को भी इस बात का अहसास था कि आर्यन उसे सामान्य नजरों से नहीं देखता, लेकिन वह इस बात को स्वीकार करने से डरती थी। उस दिन गर्मी कुछ ज्यादा ही थी, कविता के माथे पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं। वह अपनी साड़ी के पल्लू से बार-बार अपना गला और गर्दन पोंछ रही थी, जिससे उसकी छाती के ऊपरी हिस्से की झलक आर्यन की आंखों को सुकून दे रही थी। आर्यन ने देखा कि उसकी साड़ी थोड़ी नीचे खिसक गई थी, जिससे उसके गोरे और पुष्ट तरबूज साफ नजर आ रहे थे। उन तरबूजों की गहराई में जो खिंचाव था, उसने आर्यन के भीतर एक ज्वालामुखी सा दहका दिया था।
आर्यन धीरे से रसोई की तरफ बढ़ा और पानी पीने के बहाने कविता के करीब खड़ा हो गया। कविता ने मुड़कर देखा और उसकी आंखों में एक चमक दौड़ गई। ‘बहुत गर्मी है न आर्यन?’ उसने अपनी आवाज को कोमल रखते हुए पूछा। आर्यन ने उसकी आंखों में झांकते हुए कहा, ‘हाँ माँ, गर्मी तो बहुत है, लेकिन आज आप बहुत सुंदर लग रही हैं।’ यह सुनते ही कविता के गाल गुलाबी हो गए और उसने अपनी नजरें झुका लीं। उसके मन में एक संघर्ष चल रहा था – एक तरफ उसका फर्ज था और दूसरी तरफ एक दबी हुई इच्छा। आर्यन ने अपना हाथ धीरे से कविता के कंधे पर रखा, उसकी त्वचा रेशम की तरह मुलायम और ठंडी थी। उस पहले स्पर्श ने दोनों के शरीरों में बिजली सी दौड़ा दी।
कविता की सांसें तेज होने लगी थीं, उसके सीने पर टिके हुए दोनों तरबूज ऊपर-नीचे होने लगे थे। आर्यन ने देखा कि उत्तेजना के कारण उसके तरबूजों पर लगे मटर जैसे दाने अब साड़ी के पतले कपड़े के नीचे से भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। आर्यन ने अपनी उंगलियां उसकी गर्दन पर फेरीं, जिससे कविता के पूरे शरीर में एक कंपकंपी छूट गई। ‘आर्यन, यह गलत है…’ उसने बहुत ही धीमी आवाज में कहा, लेकिन उसके शरीर ने पीछे हटने की कोई कोशिश नहीं की। आर्यन ने उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके कान के पास फुसफुसाया, ‘जो दिल को सुकून दे, वो गलत कैसे हो सकता है?’
उसने कविता के होंठों का जाम चखना शुरू किया, उसकी साड़ी के पल्लू को कंधे से नीचे गिरा दिया। अब उसके सामने उसके दोनों भारी तरबूज अपनी पूरी शान के साथ मौजूद थे। आर्यन ने अपनी जुबान से उन तरबूजों की चोटियों पर लगे मटर को सहलाना शुरू किया, जिससे कविता के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। वह आर्यन के बालों को अपनी उंगलियों में जकड़ चुकी थी। आर्यन की उत्तेजना अब बेकाबू हो रही थी, उसका खीरा उसकी पैंट के भीतर पूरी तरह से तन चुका था और बाहर आने को बेताब था। उसने धीरे से कविता को गोद में उठाया और पास के कमरे के बिस्तर पर लिटा दिया।
बिस्तर पर लेटते ही कविता ने अपनी आँखें मूंद लीं, उसके चेहरे पर शर्म और चाहत का मिला-जुला भाव था। आर्यन ने उसकी साड़ी पूरी तरह से उतार दी और अब वह सिर्फ अपनी पेटीकोट और ब्लाउज में थी। आर्यन ने उसके ब्लाउज के हुक खोले, जिससे उसके दोनों विशाल तरबूज आजाद होकर बाहर आ गिरे। वह उन्हें अपने हाथों में भरकर दबाने लगा, जैसे कोई प्यासा फल का रस निचोड़ रहा हो। उसने अपनी जुबान को कविता की नाभि से नीचे की ओर ले जाना शुरू किया। जब उसने पेटीकोट के नाड़े को खोला, तो उसके सामने कविता की वह गहरी और रहस्यमयी खाई थी, जो घने जंगलों यानी बालों से ढकी हुई थी।
आर्यन ने अपनी उंगलियों से उस खाई को टटोलना शुरू किया, जो पहले से ही रस से गीली हो चुकी थी। कविता की सिसकियां अब तेज हो रही थीं, वह बिस्तर की चादर को अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़े हुए थी। आर्यन ने अपना चेहरा नीचे झुकाया और उस खाई को अपनी जुबान से चाटना शुरू किया। ‘आह… आर्यन… तुम क्या कर रहे हो… बहुत अच्छा लग रहा है…’ कविता के ये शब्द आर्यन के जोश को और बढ़ा रहे थे। उसने अपनी उंगली को खाई के भीतर गहराई तक डाल दिया और अंदर-बाहर करने लगा। कविता का पूरा शरीर धनुष की तरह मुड़ रहा था, उसकी कामुकता अपने चरम पर पहुँच रही थी।
अब आर्यन से और इंतजार नहीं हो रहा था, उसने अपनी पैंट उतारी और अपना फन फैलाए हुए साढ़े सात इंच का फौलादी खीरा बाहर निकाला। कविता ने जब उस विशाल खीरे को देखा, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गई। उसने पहले कभी इतना लंबा और मोटा खीरा नहीं देखा था। आर्यन ने उसे अपने हाथों में लेकर कविता के चेहरे के पास किया, कविता ने उसे बड़े प्यार से अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी। खीरे का हर हिस्सा उसके मुँह के भीतर जा रहा था, जिससे आर्यन के शरीर में सिहरन पैदा हो रही थी। कुछ देर खीरा चूसने के बाद, आर्यन ने उसे कविता की जांघों के बीच सेट किया।
उसने कविता की टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने खीरे की टोपी को उस गीली खाई के मुहाने पर टिका दिया। ‘माँ, अब मैं खुदाई शुरू करने जा रहा हूँ,’ उसने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा। कविता ने सिर्फ अपनी गर्दन हिलाकर अपनी रजामंदी दी। जैसे ही आर्यन ने एक झटके में आधा खीरा उस तंग खाई के भीतर धकेला, कविता के मुँह से एक चीख निकल गई। उसकी खाई बहुत तंग थी, क्योंकि वर्षों से वहां कोई बड़ी खुदाई नहीं हुई थी। आर्यन रुका नहीं, उसने अपनी कमर को तेजी से चलाना शुरू किया और पूरा खीरा जड़ तक अंदर डाल दिया।
अब कमरे में सिर्फ थप-थप की आवाजें गूँज रही थीं। आर्यन का खीरा बार-बार उस खाई की गहराइयों को नाप रहा था। ‘ओह आर्यन… और तेज… और गहरा खोदो मुझे… मैं तुम्हारी हूँ…’ कविता की इन आवाजों ने माहौल को और भी उत्तेजक बना दिया था। आर्यन ने उसे बिस्तर पर उल्टा लेटा दिया और अब वह उसे पिछवाड़े से खोदने लगा। इस पोजीशन में उसके पिछवाड़े की गोलाई और भी निखर कर सामने आ रही थी। हर धक्के के साथ कविता के तरबूज बिस्तर पर रगड़ खा रहे थे। आर्यन के शरीर का पसीना कविता की पीठ पर गिर रहा था, जो उनके शारीरिक संबंध को और भी वास्तविक बना रहा था।
काफी देर तक सामने से और पीछे से खुदाई करने के बाद, दोनों ही अपने चरम पर पहुँचने वाले थे। आर्यन ने कविता को फिर से सीधा किया और अपनी गति को और बढ़ा दिया। वह अब बहुत गहराई तक प्रहार कर रहा था, जिससे कविता की खाई का कोना-कोना थर्रा उठा था। ‘आर्यन… मेरा रस निकलने वाला है… आह… मैं जा रही हूँ…’ कविता जोर-जोर से चिल्लाने लगी। तभी आर्यन ने भी महसूस किया कि उसका खीरा अब फटने वाला है। उसने अंतिम कुछ जोरदार धक्के लगाए और अपना पूरा रस कविता की उस गहरी खाई के भीतर उड़ेल दिया।
दोनों ही बुरी तरह से हांफ रहे थे, उनके शरीर पसीने से तर-बतर थे। कविता ने आर्यन को जोर से गले लगा लिया, उसकी आंखों में तृप्ति के आंसू थे। उसे उस दिन वह सुख मिला था जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी। आर्यन उसके माथे को चूमते हुए उसके पास ही लेट गया। कमरे की हवा में अब एक अजीब सी खुशबू और शांति थी। कविता ने महसूस किया कि यह सिर्फ शरीर का मिलन नहीं था, बल्कि दो अधूरी रूहों की खुदाई थी जिसने उन्हें एक कर दिया था। उस शाम के बाद, उनका रिश्ता बदल चुका था, अब वह सिर्फ सौतेली माँ और बेटा नहीं, बल्कि एक-दूसरे की जरूरतों को समझने वाले साथी बन चुके थे।