गाँव की चिलचिलाती गर्मी में बड़े भाई की शादी का माहौल था और पूरा घर रिश्तेदारों से भरा हुआ था। चारों तरफ शोर-शराबा था लेकिन मेरा ध्यान सिर्फ अपनी दूर की भाभी सीमा पर था, जो लाल रंग की साड़ी में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। सीमा भाभी के उभरे हुए **रसीले तरबूज** साड़ी के ब्लाउज से बाहर झाँकने को बेताब थे और उनकी पतली कमर देख कर मेरा मन मचल रहा था।
शादी की रस्मों के बीच मुझे मौका मिला जब भाभी अकेले कमरे में अपना पसीना पोंछ रही थीं। उनकी पीठ पूरी तरह नंगी थी और वह अपने **बालों** को ऊपर बाँध रही थीं। मैंने चुपके से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और उनके पास जाकर खड़ा हो गया। भाभी ने आईने में मुझे देखा और शरमाते हुए मुस्कुरा दीं, जिससे मेरी रगों में दौड़ती **गर्मी शांत करना** मुश्किल हो गया था।
मैंने धीरे से उनके कंधे पर हाथ रखा और उनकी गर्दन पर अपनी उँगलियों से **मसाज** करने लगा। भाभी की सांसें तेज होने लगी थीं और उन्होंने अपनी आँखें बंद कर ली थीं। मैंने उनके कानों के पास जाकर फुसफुसाया कि वह आज बहुत ज्यादा **रसीले आम** की तरह मीठी लग रही हैं। मेरी बात सुनकर भाभी ने पीछे मुड़कर मुझे देखा और उनकी आँखों में एक अजीब सी प्यास थी जो मुझे और उकसा रही थी।
मैंने बिना देर किए उनके **मक्खन** जैसे मुलायम गालों को चूमा और धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा। भाभी ने मेरे सिर को अपने सीने से लगा लिया जहाँ उनके **रसीले संतरे** दबे जा रहे थे। मेरे पेंट के अंदर मेरा **लंबा मोटा खीरा** अब अपनी जगह बनाने के लिए फन उठा रहा था और भाभी को भी उसका अहसास होने लगा था। उन्होंने अपनी कमर को थोड़ा सा **मरोड़ना** शुरू किया जिससे मेरा उत्साह और बढ़ गया।
भाभी ने धीरे से मेरी पैंट की चैन खोली और मेरे **नसो से भरा खीरा** बाहर निकाल लिया। उसे देखते ही उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं, उन्होंने उसे अपने हाथों में पकड़ा और उसकी **मालिश** करनी शुरू कर दी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई बिजली का झटका लगा हो। फिर उन्होंने नीचे झुककर बड़े प्यार से उस **खीरा चूसना** शुरू किया, उनके मुँह की गर्मी ने मुझे पागल कर दिया था।
मैंने उन्हें उठाकर बेड पर लेटा दिया और उनकी साड़ी के पल्लू को हटाकर उनके अंगों का दीदार करने लगा। उनकी **गहरी खाई** अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहां से **मलाई** जैसा रस टपक रहा था। मैंने अपनी **उंगली से खोदना** शुरू किया तो भाभी सिसकियाँ भरने लगीं। उन्हें इतना मजा आ रहा था कि वह अपनी पीठ को बेड पर पटकने लगीं और मेरा नाम पुकारने लगीं।
भाभी की **खाई चाटना** शुरू करते ही वह पूरी तरह से मेरे वश में हो गईं। उनका पूरा बदन कांप रहा था और वह चाहती थीं कि मैं अब असली **जुताई करना** शुरू करूँ। मैंने उन्हें **घोड़ी बनाकर खोदना** तय किया और उनके पीछे खड़ा हो गया। उनके **पिछवाड़े** की गोलाई देख कर मेरा मन किया कि बस वहीं अपनी पूरी ताकत लगा दूँ और अपनी प्यास बुझा लूँ।
जैसे ही मैंने अपना **मूसल** उनकी गहराई में उतारा, भाभी के मुँह से एक चीख निकली जो ख़ुशी और दर्द का मिश्रण थी। मैं धीरे-धीरे **पिछवाड़े से खोदना** शुरू किया और हर धक्के के साथ भाभी की चीखें तेज होती गईं। कमरे में सिर्फ हमारे शरीरों के टकराने की आवाज आ रही थी। उनकी **खाई में उंगली** और मेरा औजार मिलकर एक गजब का संगीत पैदा कर रहे थे जो बहुत सुकून दे रहा था।
काफी देर तक **सवारी करना** जारी रखने के बाद मुझे महसूस हुआ कि अब मेरा **रस निकलना** शुरू होने वाला है। भाभी ने भी अपनी कमर को ऊपर उठाया और कहा कि आज मुझे पूरी तरह से खाली कर दो। मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई और अंत में अपनी **पिचकारी** का सारा माल उनकी गहराई में छोड़ दिया। हम दोनों पसीने से लथपथ बेड पर गिर पड़े और एक-दूसरे की बाहों में खो गए।
कुछ देर आराम करने के बाद भाभी ने उठकर अपने कपड़े ठीक किए और जाते-जाते मेरे कान में कहा कि यह तो बस शुरुआत है, अभी तो पूरी रात बाकी है। मेरा **बेलन** फिर से खड़ा होने लगा था लेकिन बाहर मेहमानों की आवाज सुनकर मुझे रुकना पड़ा। उस दिन के बाद से हमारी यह **खुदाई** का सिलसिला हमेशा के लिए शुरू हो गया था जो आज भी जारी है।