मानसून की वो शाम कुछ अलग ही थी। शहर की भीड़भाड़ से दूर, घने जंगलों के बीच बने उस पुराने रिसॉर्ट में सन्नाटा पसरा हुआ था, जिसे सिर्फ बारिश की बूंदों की आवाज़ तोड़ रही थी। मेरा नाम समीर है, और मैं यहाँ अपने काम के सिलसिले में आया था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। मेरी बगल वाले कमरे में मीरा रुकी हुई थी, जो मेरी पड़ोसन तो थी लेकिन शहर में हमारी कभी बात नहीं हुई थी। वह एक खूबसूरत और तरोताजा खिलते हुए गुलाब जैसी महिला थी, जिसकी खुशबू हवाओं में घुलती तो मन बेचैन हो जाता।
उस रात बिजली गुल हो गई थी। रिसॉर्ट के स्टाफ ने बताया कि पास के नदी का जलस्तर बढ़ने से मुख्य लाइन कट गई है। मैं अपने कमरे के बरामदे में खड़ा था, तभी मीरा अपने कमरे से बाहर निकली। उसने एक पतली सी साड़ी पहनी थी जो बारिश की नमी से उसके शरीर पर चिपकने लगी थी। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “समीर जी, लगता है आज की रात अंधेरे में ही गुज़रेगी।” उसकी आवाज़ में एक ऐसी मिठास थी जैसे किसी सूखे बगीचे में पहली बारिश की फुहार पड़ी हो।
हमने तय किया कि बरामदे में बैठकर ही बातें करेंगे। धीरे-धीरे हमारी बातें गहरी होती गईं। उसने बताया कि कैसे उसे प्रकृति और बागवानी (Gardening) का शौक है। बातों-बातों में माहौल में एक अजीब सी गर्मी पैदा होने लगी, जबकि बाहर मौसम ठंडा था। उसकी आंखों में वो चमक थी जो किसी प्यासी धरती को बादलों को देखकर मिलती है। मुझे महसूस हुआ कि मीरा का वह ‘निजी बगीचा’ (Private Garden) काफी समय से सूना पड़ा है और उसे एक कुशल माली की जरूरत है जो उसकी मिट्टी की गहराई तक खुदाई (Digging) कर सके।
जैसे ही बारिश तेज़ हुई, हम कमरे के अंदर चले गए। मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में उसका चेहरा किसी खिले हुए चमेली के फूल जैसा लग रहा था। मैंने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखा, तो वह सिहर उठी। वह पल ऐसा था जैसे किसी कली ने पहली बार सूरज की पहली किरण को महसूस किया हो। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, मानो वह चाहती हो कि मैं उसके इस प्राकृतिक सौंदर्य की देखभाल शुरू करूँ।
मैंने उसकी रेशमी पंखुड़ियों (Petals) जैसे होंठों को छुआ। माहौल में एक मदहोश कर देने वाली खुशबू फैल गई। मीरा ने फुसफुसाते हुए कहा, “समीर, मेरा बगीचा बहुत समय से प्यासा है, क्या तुम इसे सींचोगे?” उसकी इस मांग ने मेरे अंदर के माली को जगा दिया। मैंने धीरे-धीरे उसके बदन पर जमी उस महीन परत को हटाया, जैसे किसी कोमल पौधे से सूखे पत्ते हटाए जाते हैं।
उसका शरीर एक उपजाऊ ज़मीन की तरह था, जो पूरी तरह से तैयार था। जब मैंने उसकी कोमल क्यारियों (Curves) को सहलाया, तो वह उत्तेजना से कांपने लगी। अब समय था उस गहराई तक जाने का जहाँ जड़ें (Roots) मज़बूत होती हैं। मैंने उसे बिस्तर पर लेटाया, जो अब हमारा एक छोटा सा उपवन (Orchard) बन चुका था।
जैसे-जैसे रात परवान चढ़ी, हमारी सांसों की रफ़्तार तेज़ होती गई। मैंने अपने औजार (Gardening Tools) तैयार किए ताकि उसकी ज़मीन की खुदाई सही ढंग से की जा सके। जब पहली बार मैंने उसकी गहराई को छुआ, तो ऐसा लगा जैसे किसी सूखे झरने में अचानक पानी का वेग आ गया हो। वह कराह उठी, उसकी आवाज़ जंगल के सन्नाटे को चीर रही थी।
वह खुदाई इतनी गहरी और मज़बूत थी कि मीरा का पूरा शरीर हिल रहा था। वह कभी फूलों की तरह खिलती, तो कभी बेल की तरह मुझसे लिपट जाती। उसके बगीचे से रस (Nectar) का रिसाव होने लगा था, जो इस बात का संकेत था कि सिंचाई (Irrigation) बिल्कुल सही दिशा में हो रही है। मैंने अपनी गति बढ़ाई, जैसे कोई अनुभवी किसान फसल काटने से पहले ज़मीन को पूरी तरह तैयार करता है।
मीरा अब पूरी तरह से मेरे नियंत्रण में थी। वह बार-बार कह रही थी, “और गहरा… समीर, और गहरा खोदो।” उसकी इस मांग ने मुझे और भी उत्साहित कर दिया। हमारी इस जुगलबंदी ने उस कमरे को एक उष्णकटिबंधीय जंगल (Tropical Jungle) बना दिया था, जहाँ सिर्फ आदिम इच्छाएं और प्रकृति का मिलन था।
अचानक, जैसे मानसून की सबसे भारी बारिश होती है, हम दोनों एक साथ चरम पर पहुँच गए। उसके बगीचे का सारा अमृत बह निकला और मेरी मेहनत सफल हुई। वह पसीने से तर-बतर मेरे सीने से लग गई, जैसे कोई लतिका किसी विशाल वृक्ष का सहारा लेती है। रात भर वह बारिश होती रही और हम अपने इस निजी नंदनवन में खोए रहे।
सुबह जब सूरज निकला, तो खिड़की से आती रोशनी ने उसके चेहरे को और भी चमका दिया था। उसकी खुदाई अब अधूरी नहीं थी, बल्कि उसका कोना-कोना तृप्त हो चुका था। उसने मुस्कुराते हुए मेरी ओर देखा और कहा, “अगली बारिश में फिर से इसी तरह मेरे बगीचे का ख्याल रखना।” मैंने उसे बाँहों में भर लिया, यह जानते हुए कि इस जंगल के रिसॉर्ट की वह रात हमारी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत फसल दे गई थी।
उस दिन के बाद से, जब भी बारिश होती है, मुझे उस मिट्टी की सोंधी महक और मीरा के उस खिले हुए बगीचे की याद आ जाती है। वह खुदाई केवल जिस्मानी नहीं थी, बल्कि दो रूहों के मिलन की वो दास्तान थी जो प्रकृति के साये में लिखी गई थी।