कविता मौसी की चु@@ई
बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी और ठंडी हवाओं के झोंके खिड़की के पर्दों को बेतहाशा उड़ा रहे थे, जिससे कमरे के भीतर एक अजीब सी सिहरन और गर्माहट का अहसास हो रहा था। समीर अपनी मौसी कविता के साथ सोफे पर बैठा था, जो शहर में कुछ दिनों के लिए काम के सिलसिले में … Read more