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होटल में अजनबी की खुदाई

समीर अपने ऑफिस के काम से एक ठंडे पहाड़ी इलाके के आलीशान होटल में रुका हुआ था। शाम का वक्त था और धुंध चारों तरफ फैली हुई थी, लेकिन बारिश का नामोनिशान नहीं था। समीर अपनी बालकनी में खड़ा होकर नीचे की रोशनियों को देख रहा था, तभी उसकी नजर बगल वाली बालकनी में खड़ी … Read more

मौसी की खुदाई

दोपहर का सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेर रहा था और शहर की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ था। मैं पिछले तीन दिनों से रेखा मौसी के घर पर रुका हुआ था क्योंकि कॉलेज की छुट्टियां थीं। रेखा मौसी, जिनकी उम्र करीब 38 साल थी, लेकिन उनके शरीर की बनावट को देखकर कोई भी उन्हें इस … Read more

ऑफिस की मदहोश रात और अंजलि का समर्पण

ऑफिस की मदहोश रात और अंजलि का समर्पण—>रात के ग्यारह बज चुके थे और ऑफिस की शांत फिजाओं में सिर्फ एयर कंडीशनर की हल्की सी गूंज सुनाई दे रही थी। समीर अपनी केबिन में बैठा हुआ था, लेकिन उसका ध्यान फाइलों में नहीं बल्कि बाहर डेस्क पर काम कर रही अंजलि पर था। अंजलि ने … Read more

बचपन की सहेली को खुदाई

 रोहन और नेहा बचपन के सबसे पुराने और करीबी दोस्त थे, जो लगभग आठ साल के लंबे अंतराल के बाद एक-दूसरे से मिल रहे थे। वह पुरानी दोस्ती जो कभी गलियों में भागने और खिलौनों के लिए लड़ने तक सीमित थी, अब जवानी की दहलीज पर आकर एक अलग ही मोड़ ले चुकी थी। नेहा … Read more

मौसी की खुदाई

 रोहन अपनी कॉलेज की छुट्टियों में अपनी वंदना मौसी के घर रहने के लिए आया था। वंदना मौसी की उम्र करीब अड़तीस साल थी, लेकिन उनकी देखभाल और सादगी ने उनके यौवन को जैसे थाम कर रखा था। उनका शरीर आज भी उतना ही कसा हुआ और भरा हुआ था कि कोई भी उन्हें देखकर … Read more

बचपन की सहेली की खुदाई

रोहन और नेहा बचपन के सबसे पुराने और करीबी दोस्त थे, जो लगभग आठ साल के लंबे अंतराल के बाद एक-दूसरे से मिल रहे थे। वह पुरानी दोस्ती जो कभी गलियों में भागने और खिलौनों के लिए लड़ने तक सीमित थी, अब जवानी की दहलीज पर आकर एक अलग ही मोड़ ले चुकी थी। नेहा … Read more

तन्हाई में मामी की प्यास और रसीली खुदाई

तन्हाई में मामी की प्यास और रसीली खुदाई—> दोपहर की उस तपती गर्मी में जब पूरा मोहल्ला गहरी नींद की आगोश में सोया हुआ था, घर के भीतर का सन्नाटा भी एक अजीब सी बेचैनी पैदा कर रहा था। सुनीता मामी, जो शहर से कुछ दिनों के लिए हमारे घर रहने आई थीं, अपने कमरे … Read more

रात का हसीन सफ़र और अनजानी हमसफ़र की प्यास

रात का हसीन सफ़र और अनजानी हमसफ़र की प्यास—>ट्रेन की गड़गड़ाहट और बाहर पसरी अंधेरी रात का सन्नाटा, राहुल अपनी सीट पर बैठा खिड़की से बाहर देख रहा था। उसके ठीक सामने वाली बर्थ पर नैना बैठी थी, जिसकी उम्र करीब अट्ठाइस साल रही होगी और उसका व्यक्तित्व बहुत ही आकर्षक था। नैना ने एक … Read more

दफ्तर की वो सुहानी रात और अंजलि का साथ

दफ्तर की घड़ी में रात के ग्यारह बज चुके थे और पूरे फ्लोर पर सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ मेरी डेस्क की लाइट जल रही थी और बगल के केबिन में अंजलि अभी भी अपनी फाइलों में डूबी हुई थी। प्रोजेक्ट की डेडलाइन सिर पर थी और हम दोनों ही इस काम को खत्म करने … Read more

पुरानी दोस्त की खुदाई

5 साल बाद मेघा से मिलना किसी सपने जैसा था। शहर के उस पुराने और सुनसान गार्डन के कोने में हम दोनों एक बेंच पर बैठे थे। शाम ढल रही थी और सूरज की नारंगी किरणें उसके चेहरे पर पड़ रही थीं, जिससे उसका गोरा रंग और भी निखर उठा था। हम पुरानी यादों में … Read more